महाभारत 2.4.34
तस्यां सभायामासीनाः सुव्रताः सत्यसंगराःदिवीव देवा ब्रह्माणं युधिष्ठिरमुपासते
tasyāṃ sabhāyāmāsīnāḥ suvratāḥ satyasaṃgarāḥdivīva devā brahmāṇaṃ yudhiṣṭhiramupāsate
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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