महाभारत 2.41.22
इच्छतः सा हि सिंहस्य भीष्म जीवत्यसंशयम्तद्वत्त्वमप्यधर्मज्ञ सदा वाचः प्रभाषसे
icchataḥ sā hi siṃhasya bhīṣma jīvatyasaṃśayamtadvattvamapyadharmajña sadā vācaḥ prabhāṣase
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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