Loading
महाभारत 2.41.24
वैशंपायन उवाच · vaiśaṃpāyana uvāca
ततश्चेदिपतेः श्रुत्वा भीष्मः स कटुकं वचःउवाचेदं वचो राजंश्चेदिराजस्य शृण्वतः
tataścedipateḥ śrutvā bhīṣmaḥ sa kaṭukaṃ vacaḥuvācedaṃ vaco rājaṃścedirājasya śṛṇvataḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें