महाभारत 2.41.4
येनैष कुरुशार्दूल शार्दूल इव चेदिराट्गर्जत्यतीव दुर्बुद्धिः सर्वानस्मानचिन्तयन्
yenaiṣa kuruśārdūla śārdūla iva cedirāṭgarjatyatīva durbuddhiḥ sarvānasmānacintayan
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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