महाभारत 2.41.5
वैशंपायन उवाच · vaiśaṃpāyana uvāca
ततो न ममृषे चैद्यस्तद्भीष्मवचनं तदाउवाच चैनं संक्रुद्धः पुनर्भीष्ममथोत्तरम्
tato na mamṛṣe caidyastadbhīṣmavacanaṃ tadāuvāca cainaṃ saṃkruddhaḥ punarbhīṣmamathottaram
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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