महाभारत 2.42.10
सौवीरान्प्रतिपत्तौ च बभ्रोरेष यशस्विनःभार्यामभ्यहरन्मोहादकामां तामितो गताम्
sauvīrānpratipattau ca babhroreṣa yaśasvinaḥbhāryāmabhyaharanmohādakāmāṃ tāmito gatām
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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