महाभारत 2.42.33
शान्तविघ्नः सुखारम्भः प्रभूतधनधान्यवान्अन्नवान्बहुभक्ष्यश्च केशवेन सुरक्षितः
śāntavighnaḥ sukhārambhaḥ prabhūtadhanadhānyavānannavānbahubhakṣyaśca keśavena surakṣitaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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