महाभारत 2.42.35
ततस्त्ववभृथस्नातं धर्मराजं युधिष्ठिरम्समस्तं पार्थिवं क्षत्रमभिगम्येदमब्रवीत्
tatastvavabhṛthasnātaṃ dharmarājaṃ yudhiṣṭhiramsamastaṃ pārthivaṃ kṣatramabhigamyedamabravīt
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें