महाभारत 2.42.3
सह त्वया हि मे वध्याः पाण्डवाः कृष्ण सर्वथानृपतीन्समतिक्रम्य यैरराजा त्वमर्चितः
saha tvayā hi me vadhyāḥ pāṇḍavāḥ kṛṣṇa sarvathānṛpatīnsamatikramya yairarājā tvamarcitaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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