महाभारत 2.42.8
क्रीडतो भोजराजन्यानेष रैवतके गिरौहत्वा बद्ध्वा च तान्सर्वानुपायात्स्वपुरं पुरा
krīḍato bhojarājanyāneṣa raivatake girauhatvā baddhvā ca tānsarvānupāyātsvapuraṃ purā
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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