Loading
महाभारत 2.43.23
दह्यमाना हि राजानः पाण्डवोत्थेन वह्निनाक्षान्तवन्तोऽपराधं तं को हि तं क्षन्तुमर्हति
dahyamānā hi rājānaḥ pāṇḍavotthena vahninākṣāntavanto'parādhaṃ taṃ ko hi taṃ kṣantumarhati
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें