महाभारत 2.43.2
तस्यां दिव्यानभिप्रायान्ददर्श कुरुनन्दनःन दृष्टपूर्वा ये तेन नगरे नागसाह्वये
tasyāṃ divyānabhiprāyāndadarśa kurunandanaḥna dṛṣṭapūrvā ye tena nagare nāgasāhvaye
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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