महाभारत 2.43.4
स्ववस्त्रोत्कर्षणं राजा कृतवान्बुद्धिमोहितःदुर्मना विमुखश्चैव परिचक्राम तां सभाम्
svavastrotkarṣaṇaṃ rājā kṛtavānbuddhimohitaḥdurmanā vimukhaścaiva paricakrāma tāṃ sabhām
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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