महाभारत 2.44.14
शकुनिरुवाचधनंजयो वासुदेवो भीमसेनो युधिष्ठिरःनकुलः सहदेवश्च द्रुपदश्च सहात्मजैः
śakuniruvācadhanaṃjayo vāsudevo bhīmaseno yudhiṣṭhiraḥnakulaḥ sahadevaśca drupadaśca sahātmajaiḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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