महाभारत 2.44.17
दुर्योधन उवाच · duryodhana uvāca
अप्रमादेन सुहृदामन्येषां च महात्मनाम्यदि शक्या विजेतुं ते तन्ममाचक्ष्व मातुल
apramādena suhṛdāmanyeṣāṃ ca mahātmanāmyadi śakyā vijetuṃ te tanmamācakṣva mātula
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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