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महाभारत 2.44.22
दुर्योधन उवाच · duryodhana uvāca
त्वमेव कुरुमुख्याय धृतराष्ट्राय सौबलनिवेदय यथान्यायं नाहं शक्ष्ये निशंसितुम्
tvameva kurumukhyāya dhṛtarāṣṭrāya saubalanivedaya yathānyāyaṃ nāhaṃ śakṣye niśaṃsitum
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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