महाभारत 2.45.13
अमर्षणः स्वाः प्रकृतीरभिभूय परे स्थिताःक्लेशान्मुमुक्षुः परजान्स वै पुरुष उच्यते
amarṣaṇaḥ svāḥ prakṛtīrabhibhūya pare sthitāḥkleśānmumukṣuḥ parajānsa vai puruṣa ucyate
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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