महाभारत 2.45.17
अष्टाशीतिसहस्राणि स्नातका गृहमेधिनःत्रिंशद्दासीक एकैको यान्बिभर्ति युधिष्ठिरः
aṣṭāśītisahasrāṇi snātakā gṛhamedhinaḥtriṃśaddāsīka ekaiko yānbibharti yudhiṣṭhiraḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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