महाभारत 2.45.25कमण्डलूनुपादाय जातरूपमयाञ्शुभान्एवं बलिं समादाय प्रवेशं लेभिरे ततःkamaṇḍalūnupādāya jātarūpamayāñśubhānevaṃ baliṃ samādāya praveśaṃ lebhire tataḥइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें