महाभारत 2.45.9
आच्छादयसि प्रावारानश्नासि पिशितौदनम्आजानेया वहन्ति त्वां केनासि हरिणः कृशः
ācchādayasi prāvārānaśnāsi piśitaudanamājāneyā vahanti tvāṃ kenāsi hariṇaḥ kṛśaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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