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महाभारत 2.46.19
न मां प्रीणाति राजेन्द्र लक्ष्मीः साधारणा विभोज्वलितामिव कौन्तेये श्रियं दृष्ट्वा च विव्यथे
na māṃ prīṇāti rājendra lakṣmīḥ sādhāraṇā vibhojvalitāmiva kaunteye śriyaṃ dṛṣṭvā ca vivyathe
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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