महाभारत 2.46.28
तत्र स्म यदि शक्तः स्यां पातयेयं वृकोदरम्सपत्नेनावहासो हि स मां दहति भारत
tatra sma yadi śaktaḥ syāṃ pātayeyaṃ vṛkodaramsapatnenāvahāso hi sa māṃ dahati bhārata
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें