महाभारत 2.46.2
के च तत्र सभास्तारा राजानो ब्रह्मवित्तमके चैनमन्वमोदन्त के चैनं प्रत्यषेधयन्
ke ca tatra sabhāstārā rājāno brahmavittamake cainamanvamodanta ke cainaṃ pratyaṣedhayan
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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