महाभारत 2.46.33
तत्र मां यमजौ दूरादालोक्य ललितौ किलबाहुभिः परिगृह्णीतां शोचन्तौ सहितावुभौ
tatra māṃ yamajau dūrādālokya lalitau kilabāhubhiḥ parigṛhṇītāṃ śocantau sahitāvubhau
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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