महाभारत 2.46.3
विस्तरेणैतदिच्छामि कथ्यमानं त्वया द्विजमूलं ह्येतद्विनाशस्य पृथिव्या द्विजसत्तम
vistareṇaitadicchāmi kathyamānaṃ tvayā dvijamūlaṃ hyetadvināśasya pṛthivyā dvijasattama
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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