महाभारत 2.46.8
हितं हि परमं मन्ये विदुरो यत्प्रभाषतेक्रियतां पुत्र तत्सर्वमेतन्मन्ये हितं तव
hitaṃ hi paramaṃ manye viduro yatprabhāṣatekriyatāṃ putra tatsarvametanmanye hitaṃ tava
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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