महाभारत 2.51.23
अन्यायेन तथोक्तस्तु विदुरो विदुषां वरःनाभ्यनन्दद्वचो भ्रातुर्वचनं चेदमब्रवीत्
anyāyena tathoktastu viduro viduṣāṃ varaḥnābhyanandadvaco bhrāturvacanaṃ cedamabravīt
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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