महाभारत 2.51.3
ग्लहान्धनूंषि मे विद्धि शरानक्षांश्च भारतअक्षाणां हृदयं मे ज्यां रथं विद्धि ममास्तरम्
glahāndhanūṃṣi me viddhi śarānakṣāṃśca bhārataakṣāṇāṃ hṛdayaṃ me jyāṃ rathaṃ viddhi mamāstaram
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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