महाभारत 2.51.4
दुर्योधन उवाच · duryodhana uvāca
अयमुत्सहते राजञ्श्रियमाहर्तुमक्षवित्द्यूतेन पाण्डुपुत्रेभ्यस्तत्तुभ्यं तात रोचताम्
ayamutsahate rājañśriyamāhartumakṣavitdyūtena pāṇḍuputrebhyastattubhyaṃ tāta rocatām
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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