महाभारत 2.53.12
एवं त्वं मामिहाभ्येत्य निकृतिं यदि मन्यसेदेवनाद्विनिवर्तस्व यदि ते विद्यते भयम्
evaṃ tvaṃ māmihābhyetya nikṛtiṃ yadi manyasedevanādvinivartasva yadi te vidyate bhayam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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