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महाभारत 2.55.14
तदात्वकामः पाण्डूंस्त्वं मा द्रुहो भरतर्षभमोहात्मा तप्यसे पश्चात्पक्षिहा पुरुषो यथा
tadātvakāmaḥ pāṇḍūṃstvaṃ mā druho bharatarṣabhamohātmā tapyase paścātpakṣihā puruṣo yathā
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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