महाभारत 2.55.6विदितं ते महाराज राजस्वेवासमञ्जसम्अन्धका यादवा भोजाः समेताः कंसमत्यजन्viditaṃ te mahārāja rājasvevāsamañjasamandhakā yādavā bhojāḥ sametāḥ kaṃsamatyajanइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें