महाभारत 2.58.16
शकुनिरुवाचमाद्रीपुत्रौ प्रियौ राजंस्तवेमौ विजितौ मयागरीयांसौ तु ते मन्ये भीमसेनधनंजयौ
śakuniruvācamādrīputrau priyau rājaṃstavemau vijitau mayāgarīyāṃsau tu te manye bhīmasenadhanaṃjayau
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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