महाभारत 2.58.31
शकुनिरुवाचअस्ति वै ते प्रिया देवी ग्लह एकोऽपराजितःपणस्व कृष्णां पाञ्चालीं तयात्मानं पुनर्जय
śakuniruvācaasti vai te priyā devī glaha eko'parājitaḥpaṇasva kṛṣṇāṃ pāñcālīṃ tayātmānaṃ punarjaya
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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