महाभारत 2.58.35
चरमं संविशति या प्रथमं प्रतिबुध्यतेआ गोपालाविपालेभ्यः सर्वं वेद कृताकृतम्
caramaṃ saṃviśati yā prathamaṃ pratibudhyateā gopālāvipālebhyaḥ sarvaṃ veda kṛtākṛtam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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