महाभारत 2.58.36
आभाति पद्मवद्वक्त्रं सस्वेदं मल्लिकेव चवेदीमध्या दीर्घकेशी ताम्राक्षी नातिरोमशा
ābhāti padmavadvaktraṃ sasvedaṃ mallikeva cavedīmadhyā dīrghakeśī tāmrākṣī nātiromaśā
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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