महाभारत 2.58.39
चुक्षुभे सा सभा राजन्राज्ञां संजज्ञिरे कथाःभीष्मद्रोणकृपादीनां स्वेदश्च समजायत
cukṣubhe sā sabhā rājanrājñāṃ saṃjajñire kathāḥbhīṣmadroṇakṛpādīnāṃ svedaśca samajāyata
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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