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महाभारत 2.60.40
भीष्म उवाच · bhīṣma uvāca
न धर्मसौक्ष्म्यात्सुभगे विवक्तुं; शक्नोमि ते प्रश्नमिमं यथावत्अस्वो ह्यशक्तः पणितुं परस्वं; स्त्रियश्च भर्तुर्वशतां समीक्ष्य
na dharmasaukṣmyātsubhage vivaktuṃ; śaknomi te praśnamimaṃ yathāvatasvo hyaśaktaḥ paṇituṃ parasvaṃ; striyaśca bharturvaśatāṃ samīkṣya
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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