महाभारत 2.61.39
तच्छ्रुत्वा पाण्डवाः सर्वे स्वानि वासांसि भारतअवकीर्योत्तरीयाणि सभायां समुपाविशन्
tacchrutvā pāṇḍavāḥ sarve svāni vāsāṃsi bhārataavakīryottarīyāṇi sabhāyāṃ samupāviśan
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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