महाभारत 2.61.5
एषा ह्यनर्हती बाला पाण्डवान्प्राप्य कौरवैःत्वत्कृते क्लिश्यते क्षुद्रैर्नृशंसैर्निकृतिप्रियैः
eṣā hyanarhatī bālā pāṇḍavānprāpya kauravaiḥtvatkṛte kliśyate kṣudrairnṛśaṃsairnikṛtipriyaiḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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