महाभारत 2.61.76
समक्षदर्शनात्साक्ष्यं श्रवणाच्चेति धारणात्तस्मात्सत्यं ब्रुवन्साक्षी धर्मार्थाभ्यां न हीयते
samakṣadarśanātsākṣyaṃ śravaṇācceti dhāraṇāttasmātsatyaṃ bruvansākṣī dharmārthābhyāṃ na hīyate
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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