महाभारत 2.61.7
अर्जुन उवाच · arjuna uvāca
न पुरा भीमसेन त्वमीदृशीर्वदिता गिरःपरैस्ते नाशितं नूनं नृशंसैर्धर्मगौरवम्
na purā bhīmasena tvamīdṛśīrvaditā giraḥparaiste nāśitaṃ nūnaṃ nṛśaṃsairdharmagauravam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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