Loading
महाभारत 2.63.11
कदलीदण्डसदृशं सर्वलक्षणपूजितम्गजहस्तप्रतीकाशं वज्रप्रतिमगौरवम्
kadalīdaṇḍasadṛśaṃ sarvalakṣaṇapūjitamgajahastapratīkāśaṃ vajrapratimagauravam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलेंकदलीदण्डसदृशं सर्वलक्षणपूजितम्गजहस्तप्रतीकाशं वज्रप्रतिमगौरवम्
kadalīdaṇḍasadṛśaṃ sarvalakṣaṇapūjitamgajahastapratīkāśaṃ vajrapratimagauravam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें