महाभारत 2.66.19
त्रयोदशं च सजने अज्ञाताः परिवत्सरम्ज्ञाताश्च पुनरन्यानि वने वर्षाणि द्वादश
trayodaśaṃ ca sajane ajñātāḥ parivatsaramjñātāśca punaranyāni vane varṣāṇi dvādaśa
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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