महाभारत 2.66.21एतत्कृत्यतमं राजन्नस्माकं भरतर्षभअयं हि शकुनिर्वेद सविद्यामक्षसंपदम्etatkṛtyatamaṃ rājannasmākaṃ bharatarṣabhaayaṃ hi śakunirveda savidyāmakṣasaṃpadamइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें