महाभारत 2.66.23
ते च त्रयोदशे वर्षे पारयिष्यन्ति चेद्व्रतम्जेष्यामस्तान्वयं राजन्रोचतां ते परंतप
te ca trayodaśe varṣe pārayiṣyanti cedvratamjeṣyāmastānvayaṃ rājanrocatāṃ te paraṃtapa
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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