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महाभारत 2.66.34
न वै वृद्धो बालमतिर्भवेद्राजन्कथंचनत्वन्नेत्राः सन्तु ते पुत्रा मा त्वां दीर्णाः प्रहासिषुः
na vai vṛddho bālamatirbhavedrājankathaṃcanatvannetrāḥ santu te putrā mā tvāṃ dīrṇāḥ prahāsiṣuḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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