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महाभारत 2.66.37
यथेच्छन्ति तथैवास्तु प्रत्यागच्छन्तु पाण्डवाःपुनर्द्यूतं प्रकुर्वन्तु मामकाः पाण्डवैः सह
yathecchanti tathaivāstu pratyāgacchantu pāṇḍavāḥpunardyūtaṃ prakurvantu māmakāḥ pāṇḍavaiḥ saha
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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