महाभारत 2.66.3
दुर्योधनं समासाद्य सामात्यं भरतर्षभदुःखार्तो भरतश्रेष्ठ इदं वचनमब्रवीत्
duryodhanaṃ samāsādya sāmātyaṃ bharatarṣabhaduḥkhārto bharataśreṣṭha idaṃ vacanamabravīt
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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