महाभारत 2.69.3
युयुत्सुं संजयं चैव तथैवान्यान्सभासदःसर्वानामन्त्र्य गच्छामि द्रष्टास्मि पुनरेत्य वः
yuyutsuṃ saṃjayaṃ caiva tathaivānyānsabhāsadaḥsarvānāmantrya gacchāmi draṣṭāsmi punaretya vaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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